ब्लड शुगर की इकाइयाँ कैसे बदलें?
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जिस ब्लड शुगर के अंक के साथ इकाई नहीं लिखी, वह अधूरी जानकारी है, क्योंकि दोनों पैमानों का फ़र्क़ कई गुना का है। ब्लड शुगर के दो लेखन एक तय गुणांक से आपस में बदले जाते हैं। HbA1c के दो पैमाने गुणांक से नहीं, एक प्रकाशित रिश्ते से बदलते हैं। कौन-सा छपेगा, यह देश के स्तर पर तय होता है।
ब्लड शुगर नापने वाला यंत्र भी और प्रयोगशाला की विधि भी एक ही चीज़ नापते हैं: खून में ग्लूकोज़ की सांद्रता। इस सांद्रता को काग़ज़ पर लिखने के दो रास्ते हैं। एक द्रव्यमान को आयतन से बाँटता है और नतीजा डेसीलिटर पर मिलीग्राम में देता है। दूसरा पदार्थ की मात्रा गिनता है और लिटर पर मिलीमोल में लिखता है। दोनों रास्ते एक ही सांद्रता का वर्णन करते हैं।
इस बँटवारे की वजह इतिहास में है। कुछ देशों ने द्रव्यमान वाला लेखन जारी रखा; बाक़ी अंतरराष्ट्रीय इकाई व्यवस्था में जाते समय नतीजा पदार्थ की मात्रा के रूप में छापने लगे। बीच का बदलाव तय है, क्योंकि ग्लूकोज़ के अणु का भार किसी भी देश में नापा जाए, वही रहता है। द्रव्यमान वाले अंक को 18 से बाँटना पदार्थ-मात्रा के पैमाने पर ले जाता है, और उसी अंक से गुणा करना वापस लौटा लाता है। यह क्रिया देश के हिसाब से नहीं खिसकती, यंत्र के हिसाब से नहीं बैठाई जाती, और बरसों में नई भी नहीं होती।
काग़ज़ पर HbA1c, A1c या शक्कर-बँधा हीमोग्लोबिन नाम से आने वाली पंक्ति में बँटवारा और साफ़ है। एक पैमाना नतीजा प्रतिशत में देता है और बड़े नैदानिक अध्ययनों के इस्तेमाल किए पुराने लेखन से जुड़ता है। दूसरा पैमाना सीधे गिनता है कि हीमोग्लोबिन का कितना हिस्सा शक्कर से बँधा है, और नतीजा मोल पर मिलीमोल में लिखता है। अंक का पैमाना इस तरह पूरा खिसक जाता है। यहाँ का रूपांतरण एक अकेली गुणा की तरह नहीं ठहरता: यह एक ऐसा रिश्ता है जिसका ढाल और शुरुआती बिंदु है, जो अंतरराष्ट्रीय सहमति से प्रकाशित हुआ है और नियमित रूप से जाँचा जाता है।
| माप | एक पैमाना | दूसरा पैमाना | बीच का रिश्ता |
|---|---|---|---|
| ब्लड शुगर | डेसीलिटर पर मिलीग्राम (mg/dL) | लिटर पर मिलीमोल (mmol/L) | एक तय गुणांक से बदलता है |
| HbA1c | प्रतिशत (NGSP/DCCT पैमाना) | मोल पर मिलीमोल (IFCC पैमाना) | एक प्रकाशित रिश्ते से बदलता है |
कौन-सा पैमाना छपेगा, यह देश के स्तर पर तय होता है। कहीं दोनों लेखन काग़ज़ पर साथ छपते हैं, कहीं सिर्फ़ एक। किसी विदेशी रिपोर्ट में अकेला एक पैमाना देखना इसीलिए आम है, और वह अकेला पैमाना वह न भी हो जिसका पाठक को अभ्यास है।
कोई काग़ज़ किस पैमाने का इस्तेमाल करता है, यह अकसर उसी काग़ज़ पर लिखा होता है। इकाई नतीजे के ठीक बगल में या खाने के शीर्षक में रहती है; वह छोटा-सा लिखा हुआ पन्ने की सबसे तय करने वाली जानकारियों में है। कोष्ठक में दूसरा अंक दिख सकता है। यह अंक या तो उसी नतीजे का दूसरे पैमाने वाला रूप है, या प्रयोगशाला का संदर्भ दायरा, या विधि की टिप्पणी। कौन-सा है, यह कोष्ठक के बगल में लिखी इकाई बता देती है।
प्रयोगशाला के नतीजे को रोज़ के मापों की भाषा में लाने वाला एक और अंक है: अनुमानित औसत ग्लूकोज़। उसका अपना लेख इस पन्ने से बाहर खड़ा है।
विदेश में कराई गई किसी जाँच में नतीजे के ठीक बगल का छोटा लिखा हुआ चार संक्षेपों में से एक ढोता है: mg/dL, mmol/L, प्रतिशत का चिह्न या mmol/mol। पन्ने के सारे मान उसी संक्षेप के पैमाने में पढ़े जाते हैं।
स्रोत
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- Sacks DB, Arnold M, Bakris GL, et al. Guidelines and recommendations for laboratory analysis in the diagnosis and management of diabetes mellitus. Clin Chem. 2011;57(6):e1-e47.