बीमारी के दिनों में दवाओं का क्या?
· 2 मिनट

बुख़ार, उल्टी या दस्त के साथ बीतने वाला दिन ब्लड शुगर को दो अलग दिशाओं से एक साथ खींचता है। बीमारी का तनाव उसे ऊपर धकेलता है; न खा पाना और द्रव का नुक़सान नीचे। कुछ दवाओं का बर्ताव भी ऐसे दिनों में बदल जाता है, क्योंकि शरीर का द्रव संतुलन और गुर्दे की रफ़्तार वही नहीं रहते।
बुख़ार वाला संक्रमण शरीर को चौकन्ना कर देता है और कोर्टिसोल, एड्रेनालिन तथा ग्लूकागन जैसे प्रति-नियामक हार्मोनों को ऊपर धकेलता है। ये हार्मोन ऊतकों के इंसुलिन को दिए जाने वाले जवाब को कुंद करते हैं और यकृत के शक्कर बनाने को तेज़ कर देते हैं। यानी बीमार होना, कुछ भी खाए बिना भी ब्लड शुगर को ऊपर ले जाता है। इसके ख़िलाफ़ चलने वाली एक ताक़त और है। उल्टी और दस्त खाना भी ले जाते हैं और द्रव भी, और तस्वीर को उलटी तरफ़ खींच देते हैं।
असली नाज़ुक बिंदु पानी की कमी है। द्रव घटे तो गुर्दे तक जाने वाला खून का बहाव गिरता है और गुर्दा खून से पदार्थ साफ़ करने की रफ़्तार धीमी कर देता है। जो दवाएँ शरीर से बड़े हिस्से में गुर्दे के रास्ते निकलती हैं, वे इस धीमेपन से सीधे प्रभावित होती हैं। मेटफ़ॉर्मिन इसका सबसे जाना-पहचाना उदाहरण है: सामान्य हालत में बिना अड़चन निकलने वाला पदार्थ, निकास का रास्ता तंग होते ही खून में जमा हो जाता है और लैक्टिक अम्ल के संतुलन पर ज़ोर डालता है।
SGLT-2 अवरोधक अलग रास्ता लेते हैं। यह परिवार शक्कर को पेशाब से बाहर भेजता है इसलिए द्रव का नुक़सान वैसे भी बढ़ा देता है; बीमारी का लाया नुक़सान उसी पर चढ़ जाता है। उसका एक दूसरा असर भी है। वह इंसुलिन और ग्लूकागन के बीच का संतुलन खिसका देता है, शरीर ईंधन के रूप में वसा की ओर मुड़ता है और कीटोन बनना तेज़ हो जाता है। जो अम्ल वाली तस्वीर सामने आती है, वह माप ऊँचा न दिखने पर भी बन सकती है; साहित्य में उसका नाम सम-शर्करा कीटोएसिडोसिस है।
दोनों तस्वीरें विरल हैं। विरल होना यह नहीं कहता कि हालतें एक पर एक चढ़ जाएँ तब भी वे मामूली हैं। नाज़ुकी की वजह परिवार दर परिवार बदलती है; हर परिवार की कमज़ोर जगह अलग है।
- मेटफ़ॉर्मिन: निकास का रास्ता लगभग पूरा गुर्दे से जाता है, और द्रव का नुक़सान इस रास्ते को सबसे पहले तंग करता है।
- SGLT-2 अवरोधक: द्रव का नुक़सान गहरा करता है और कीटोन बनना आसान कर देता है।
- सल्फ़ोनिलयूरिया: अग्न्याशय को उकसाता रहता है, और खाना न जाए तो कम शुगर की संभावना बढ़ जाती है।
- GLP-1 अभिकर्ता: पेट का ख़ाली होना धीमा करता है, मतली और भूख न लगना गहरा कर देता है।
- रक्तचाप की कुछ दवाएँ और पेशाब बढ़ाने वाली: द्रव का नुक़सान और गुर्दे का बोझ एक ही दिशा में धकेलती हैं।
- इंसुलिन: इस सूची में उलटी खड़ी है, ज़रूरत ग़ायब नहीं होती।
इंसुलिन इस सूची में सचमुच अलग जगह खड़ी है। संक्रमण के दौरान शरीर की इंसुलिन की ज़रूरत घटती नहीं; अकसर बढ़ जाती है। थाली ख़ाली रह गई इसलिए इंसुलिन का पूरी तरह हट जाना, पहली दिक़्क़त के ऊपर दूसरा दरवाज़ा खोल देता है: शरीर वसा जलाने पर उतर आता है और कीटोन जमा होते हैं। यानी खाना न खा पाना, इंसुलिन की ज़रूरत अपने आप शून्य नहीं कर देता।
इन सबका जोड़ यह है। बीमारी के दिन क्या होगा, यह दवा परिवार पर, गुर्दे की हालत पर, खाना पेट में ठहरा या नहीं इस पर, और बीमारी कितने दिन चलेगी इस पर टिका है। कोई एक आम वाक्य इन चार चरों को एक साथ नहीं सँभाल सकता। इसीलिए बीमारी के दिनों के नियम वह तैयार योजना हैं जिसे व्यक्ति स्वस्थ रहते हुए इलाज टीम के साथ बनाता है। बुख़ार चढ़ जाए और नींद टूट जाए तो नया फ़ैसला बनाना कठिन है। पहले से लिखा हुआ पाठ, फ़ैसले को किसी स्वस्थ दिन पर ले जाता है।
स्रोत
- Watson KE, Dhaliwal K, Robertshaw S, Verdin N, Benterud E, Lamont N, Drall KM, McBrien K, Donald M, Tsuyuki RT, Campbell DJT, Pannu N, James MT. Consensus Recommendations for Sick Day Medication Guidance for People With Diabetes, Kidney, or Cardiovascular Disease: A Modified Delphi Process. American Journal of Kidney Diseases. 2023;81(5):564-574.
- Dyatlova N, Tobarran NV, Kannan L, North R, Wills BK. Metformin-Associated Lactic Acidosis (MALA). In: StatPearls. Treasure Island (FL): StatPearls Publishing; 2026. Last updated 2023 Apr 17.
- Somagutta MR, Agadi K, Hange N, Jain MS, Batti E, Emuze BO, Amos-Arowoshegbe EO, Popescu S, Hanan S, Kumar VR, Pormento MKL. Euglycemic Diabetic Ketoacidosis and Sodium-Glucose Cotransporter-2 Inhibitors: A Focused Review of Pathophysiology, Risk Factors, and Triggers. Cureus. 2021;13(3):e13665.
- American Diabetes Association Professional Practice Committee. 9. Pharmacologic Approaches to Glycemic Treatment: Standards of Care in Diabetes—2026. Diabetes Care. 2026;49(Suppl 1):S183–S215. doi:10.2337/dc26-S009
- Brealey D, Singer M. Hyperglycemia in Critical Illness: A Review. Journal of Diabetes Science and Technology. 2009;3(6):1250-1260.