पोषण का लेबल कैसे पढ़ें?
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पोषण का लेबल पढ़ना क्रम का काम है और वह क्रम सबसे ऊपर से शुरू होता है, यानी सर्विंग के नाप से। जो व्यक्ति इस क्रम को लाँघता है, वह सही अंक को ग़लत मात्रा के लिए पढ़ता है। सामग्री की सूची भी अलग जानकारी ढोती है, क्योंकि वहाँ माल वज़न के हिसाब से क़तार लेता है। मात्रा जाने बिना बाक़ी पंक्तियाँ पढ़ना कठिन है।
सबसे ऊपर की पंक्ति हर चीज़ की चाबी है। वह सर्विंग का नाप है। लेबल के सारे अंक उसी मात्रा को बताते हैं, पूरे पैकेट को नहीं। कुछ लेबलों में दो खाने होते हैं, एक सौ ग्राम के हिसाब से और दूसरा डिब्बे या सर्विंग के हिसाब से। ग़लत खाना पढ़ने वाला अंक को अपने असल से बड़ा या छोटा देखता है। डिब्बा हाथ में पलटकर यह फ़र्क़ कर लेना कुछ सेकंड लेता है।
अगला पड़ाव कार्बोहाइड्रेट की पंक्ति है। वह अहम है। यह पंक्ति एक छाते की तरह काम करती है और स्टार्च तथा शक्कर दोनों को साथ गिनती है। शक्कर की पंक्ति नीची है इसलिए कुल भी नीचा होगा, यह सोचना इसीलिए भ्रम में डालता है। एक बिस्किट और एक नमकीन क्रैकर की शक्कर वाली पंक्तियाँ बहुत अलग हो सकती हैं, जबकि उनके कार्बोहाइड्रेट एक-दूसरे के पास निकल सकते हैं। रेशा इस छाते के भीतर है या नहीं, यह लेबल के देश के नियम पर निर्भर है। किसी तरतीब में रेशा कार्बोहाइड्रेट की पंक्ति के भीतर गिना जाता है, और किसी में अलग पंक्ति बनकर बाहर खड़ा रहता है। फ़र्क़ काग़ज़ ख़ुद दिखा देता है। ग़ौर से देखिए।
| लेबल की पंक्ति | वह क्या बताती है | अकसर होने वाली ग़लती |
|---|---|---|
| सर्विंग का नाप | वह मात्रा जिस पर सारे अंक टिके हैं | उसे पूरे पैकेट से गड्डमड्ड कर देना |
| कार्बोहाइड्रेट | स्टार्च और शक्कर का जोड़ | सिर्फ़ शक्कर वाली पंक्ति देखना |
| शक्कर | कुल कार्बोहाइड्रेट के भीतर की उप-पंक्ति | उसे अलग मद गिनना |
| रेशा | न पचने वाली कार्बोहाइड्रेट क़िस्म | हर लेबल में उसे कार्बोहाइड्रेट के भीतर गिनना |
| शक्कर-अल्कोहल | आंशिक रूप से सोखा जाने वाला मीठा परिवार | उसे बिना कार्बोहाइड्रेट का गिनना |
| सामग्री | वज़न के घटते क्रम में | क्रम को बेतरतीब मान लेना |
शक्कर वाली पंक्ति के नीचे दो अलग विचार हैं। कुल शक्कर खाने के भीतर की सारी सादा शक्करों को समेटती है, और दूध तथा फल की क़ुदरती शक्कर भी उसी में शामिल है। मिलाई गई शक्कर वह हिस्सा दिखाती है जो बनाने के दौरान उत्पाद में गया। विश्व स्वास्थ्य संगठन एक चौड़ा समूह परिभाषित करता है। जिसे वह मुक्त शक्कर कहता है उस समूह में मिलाई गई शक्कर के साथ-साथ शहद, चाशनी और फल के रस की शक्कर भी आती है। मिलाई गई शक्कर की अलग पंक्ति हर लेबल पर नहीं होती।
सामग्री की सूची उसी उत्पाद को दूसरी तरफ़ से बताती है। माल वज़न के घटते क्रम में चलता है, यानी शुरू में जो है उत्पाद में सबसे ज़्यादा वही है। शक्कर एक से ज़्यादा नामों से आ सकती है, जैसे चाशनी, गाढ़ा रस, शहद और ऐसे ही नाम। हर एक अलग-अलग आए तो वह सूची की निचली क़तारों में रह जाती है, जबकि उनका जोड़ ऊपर चढ़ जाता है। सूची देखना इसीलिए अंकों को देखने को पूरा करता है।
लेबल पढ़ना एक हुनर है और समय के साथ तेज़ होता है। फ़्रिज से पैकेट उठाते समय या ख़रीदारी के दौरान वही तीन क़दम काफ़ी होते हैं। एक ही उत्पाद के छोटे और बड़े आकार अलग सर्विंग नाप ढो सकते हैं। इसीलिए कोई जाना-पहचाना उत्पाद भी बीच-बीच में पलटकर पढ़े जाने का हक़दार है। बाक़ी ब्योरा है और ज़रूरत पड़ने पर देखना काफ़ी है।
स्रोत
- Codex Alimentarius Commission. Guidelines on Nutrition Labelling (CXG 2-1985), adopted 1985, revised 2011, amended through 2013; Annex revised 2015. Rome: FAO/WHO.
- Codex Alimentarius Commission. General Standard for the Labelling of Prepackaged Foods, CXS 1-1985 (Codex Stan 1-1985), last amended 2010. FAO/WHO, Rome.
- World Health Organization. Guideline: Sugars Intake for Adults and Children. Geneva: World Health Organization; 2015. ISBN 978-92-4-154902-8.
- American Diabetes Association Professional Practice Committee. 5. Facilitating Positive Health Behaviors and Well-being to Improve Health Outcomes: Standards of Care in Diabetes-2026. Diabetes Care. 2026;49(Suppl 1):S89-S131. doi:10.2337/dc26-S005