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वज़न और आदतें

वज़न घटाना इतना कठिन क्यों है?

· 2 मिनट

हल्के भूरे सादे पर्दे के सामने कमान की तरह तीन पूरे चक्कर लेती लाल बटी रस्सी; उसके दोनों सिरे फ़्रेम के बाहर चले जाते हैं।

कठिनाई का बड़ा हिस्सा इरादे के बाहर रहता है: वज़न घटाने का शरीर दो अलग तरफ़ से विरोध करता है। ख़र्च होने वाली ऊर्जा उम्मीद से नीचे उतर आती है और भूख के संकेत मज़बूत हो जाते हैं। यह विरोध कुछ हफ़्तों तक सीमित नहीं रहता। माप करने वाले अध्ययनों में, एक साल बीत जाने के बाद भी पुरानी तरतीब पर लौटना नहीं दिखा।

पहले ऊर्जा की तरफ़। वज़न घटे तो ढोया जाने वाला द्रव्यमान छोटा होता है और आराम की हालत में ख़र्च होने वाली ऊर्जा क़ुदरती तौर पर गिरती है; यह हिस्सा अपेक्षित है। अनपेक्षित हिस्सा यह है कि गिरावट हिसाब से नीचे उतर जाती है। मोटा आकार यों है: घटाए गए हर किलो पर रोज़ का ख़र्च बीस से तीस कैलोरी पीछे हटता है, जबकि भूख सौ कैलोरी जितनी बढ़ जाती है। बरसों बाद भी चलता हुआ नापा गया कहीं गहरा अनुकूलन भी बताया गया है। वह नतीजा एक चरम हस्तक्षेप में शामिल एक छोटे समूह से आता है।

हार्मोन की तरफ़ उसी दिशा में काम करती है। वसा ऊतक से छूटने वाला भरे होने का संदेशवाहक घटता है, पेट से आने वाला भूख का संदेशवाहक चढ़ता है, और खाने के बाद मैदान में आने वाले तृप्ति के संकेत कमज़ोर पड़ जाते हैं। उन्हीं लोगों को एक साल बाद दोबारा नापा गया तो तस्वीर शुरुआती बिंदु पर नहीं लौटी थी; और बताई गई भूख भी ऊँची बनी रही थी। जिस शरीर ने वज़न घटाया है, वह वज़न घटाने से पहले वाले अपने रूप के मुक़ाबले ज़्यादा तेज़ भूख बनाता है। खाना ख़त्म हुए एक घंटा हुआ हो और शाम को रसोई की ओर लौटने का मन करे — रोज़मर्रा में इसका यही रूप है। यानी यह नापी जा सकने वाली चीज़ है। अपराध-बोध इस तंत्र के ऊपर कुछ नहीं जोड़ता, वह सिर्फ़ काम भारी कर देता है।

मधुमेह में एक परत और है। ब्लड शुगर घटाने वाले दवा परिवारों का एक हिस्सा तराज़ू को ऊपर खींचता है और एक हिस्सा नीचे; कौन किस दिशा में खड़ा है, इसे एक अलग लेख उठाता है। दूसरी परत शक्कर ख़ुद है। गिरने की सीमा के पास पहुँचने पर उभरने वाली खाने की ज़रूरत, इरादे से बहस करने की चीज़ नहीं, सीधे-सीधे शरीरक्रिया की घटना है। वह लहर सामान्य भूख से अलग होती है: अचानक आती है, भोजन का समय नहीं पहचानती, और कुछ खा लेने के थोड़ी देर बाद हट जाती है। उसके निशानों का एक-एक ब्योरा इस पन्ने पर नहीं, “शुगर गिरने का पता कैसे चलता है?” शीर्षक में है। दिन में दो बार आने वाली ऐसी एक लहर, उस दिन की पूरी योजना अकेले ही दोबारा लिख देती है।

घटाया हुआ वज़न बचाए रखना, घटाने से अलग काम है। शोध बचाने के चरण को अपने आप में उठाते हैं। उसके साथ सबसे टिकाऊ ढंग से जुड़े बर्ताव ये हैं: नियमित तौलना और लिखना, तय मात्रा वाले भोजन, और निगरानी का किसी व्यक्ति या समूह के साथ चलते रहना। इस चरण का काम किसी लक्ष्य तक पहुँचना नहीं, एक तरतीब को खड़ा रखना है। बेल्ट का एक साल पहले वाले छेद पर रह जाना, वज़न घटाते समय लगी मेहनत से अलग तरह की मेहनत माँगता है। वापस चढ़ा हुआ वज़न चरित्र की कमज़ोरी का सबूत नहीं है।

स्रोत

  1. Sumithran P, Prendergast LA, Delbridge E, et al. Long-term persistence of hormonal adaptations to weight loss. N Engl J Med. 2011;365(17):1597-1604.
  2. Fothergill E, Guo J, Howard L, et al. Persistent metabolic adaptation 6 years after “The Biggest Loser” competition. Obesity (Silver Spring). 2016;24(8):1612-1619.
  3. Hall KD, Kahan S. Maintenance of lost weight and long-term management of obesity. Med Clin North Am. 2018;102(1):183-197.

यह लेख सिर्फ़ जानकारी के लिए है; यह न रोग की पहचान है, न इलाज या मात्रा का निर्देश। आपके इलाज का फ़ैसला हमेशा वह होता है जो आप अपने डॉक्टर के साथ मिलकर लेते हैं।

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