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लंबे समय में क्या होता है

नसें, घाव और पैर

3 लेख

हल्के भूरे पर्दे पर रंगीन इन्सुलेशन वाले तार; दाईं ओर कसकर बँधा एक गुच्छा बाईं ओर जाकर एक-एक रेशे में खुलकर बिखर जाता है।न्यूरोपैथी क्या है?न्यूरोपैथी ब्लड शुगर के लंबे समय ऊँचा चलने से नसों का घिसना और संवहन का बिगड़ना है। उसका सबसे जाना-पहचाना रूप पैर की उँगलियों से शुरू होता है और दोनों टाँगों में एक साथ ऊपर चढ़ता है। सुन्नपन, झुनझुनी और जलन इस तस्वीर के पहचाने निशान हैं; उसकी एक अलग शाखा भीतरी अंगों की नसें पकड़ती है। · 3 मिनटआगे पढ़ें

नस कोई तार नहीं, एक जीवित ऊतक है। नस की अपनी केशिका जाली होती है और उसके रेशों को वही जाली पोसती है। लंबे समय ऊँचा चलने वाला ग्लूकोज़ इन पतली वाहिकाओं को तंग करता है और साथ ही नस-कोशिका के भीतर का रसायन भी बिगाड़ देता है। बचे-खुचे उत्पाद जमा होते हैं, रेशे को घेरने वाला ग़िलाफ़ पतला होता है और संवहन धीमा पड़ता है। बारी सबसे लंबे रेशों की है, क्योंकि उनका पोसा जाना सबसे नाज़ुक है। धड़ से सबसे दूर की जगह पैर हैं।

फैलाव बेतरतीब नहीं है। तस्वीर पैर की उँगलियों से शुरू होती है, दोनों तरफ़ एक साथ चलती है और बरसों में पहले टख़ने तक, फिर पिंडली तक चढ़ती है। हाथों की बारी कहीं देर से आती है। इस तरतीब को लंबाई से बँधा लगाव कहते हैं: सबसे लंबा रेशा पहले और सबसे छोटा आख़िर में प्रभावित होता है। दोनों पैरों का एक ही समय और एक ही ऊँचाई पर लगना, इस तस्वीर को नसों की दूसरी दिक़्क़तों से अलग करने वाला निशान है।

उसी नुक़सान के दो चेहरे हैं और दोनों बहुत अलग दिखते हैं। किसी व्यक्ति में जलन, चुभन और बिजली के झटके जैसा दर्द आगे आता है; वह रात में बिस्तर पर बढ़ जाता है और रज़ाई का बोझ भी परेशान करता है। किसी दूसरे में कुछ भी महसूस नहीं होता, और यह ख़ामोश चेहरा हलका नहीं है। संवेदना का कुंद होना बरसों तक ख़ुद को बताए बिना आगे बढ़ता है; इसकी पैर पर क्या क़ीमत पड़ती है, यह पैरों वाला लेख उठाता है। ख़ामोश चेहरे का निशान कोई लक्षण नहीं, एक कमी है: अँधेरे गलियारे में संतुलन का बिगड़ना, पैर कहाँ पड़ा है इसे आँख से पक्का करने की ज़रूरत।

लगी हुई नसों का समूहवह क्या ढोता हैवह कैसे ज़ाहिर होता है
संवेदी नसेंछूने, गरमी और दर्द की ख़बरसुन्नपन, झुनझुनी, जलन, संवेदना का कुंद होना
गति की नसेंपैर की छोटी माँसपेशियों तक जाने वाला आदेशउँगलियों का भीतर मुड़ना, दबाव के बिंदुओं का जगह बदलना
स्वायत्त नसेंबिना इच्छा चलने वाले भीतरी कामों का नियमनपेट के ख़ाली होने में देर, खड़े होते ही रक्तचाप का गिरना
पसीने की नसेंत्वचा की नमी का नियमनपैर की चमड़ी का सूखना और फटना

स्वायत्त शाखा अलग शीर्षक है और वह शरीर के बिना इच्छा चलने वाले कामों को पकड़ती है। पेट ख़ाली करने वाली माँसपेशियाँ धीमी पड़ें तो खाना उम्मीद से देर में आगे बढ़ता है। नाश्ते के घंटों बाद तक पेट में भारीपन रहता है, और खाने के खून में जाने का समय अनुमान से बाहर हो जाता है। बिस्तर से तेज़ी से उठने पर रक्तचाप सँभालने वाला पलटाव देर करे तो सिर घूमता है और आँखों के आगे अँधेरा आता है। सीढ़ी चढ़ते समय दिल की रफ़्तार का क़ुदरती लचीलापन घट जाता है। त्वचा को नम रखने वाली पसीने की नसें कुंद हों तो पैर की चमड़ी सूखकर फट जाती है।

उसी शाखा के भीतर एक चेतावनी का काम भी है: शुगर गिरने के पहले संकेत इन्हीं नसों से निकलते हैं। वे कुंद हों तो संकेत कमज़ोर पड़ जाते हैं; और गिरावट अकसर सिर्फ़ माप से भाँपी जाती है। इसे हाइपोग्लाइसीमिया की पहचान का खोना कहते हैं। वही रास्ता दिल से आने वाली दर्द की ख़बर भी ढोता है। वह ख़बर कमज़ोर पड़े तो सीने के दर्द की जगह एक असामान्य थकान, साँस फूलना या मतली ले सकती है।

न्यूरोपैथी चुपचाप बढ़ती है इसलिए लक्षण का इंतज़ार किए बिना जाँच में खोजी जाती है; पैर में किसे और किससे देखा जाता है, यह पैरों की जाँच वाला लेख बताता है। ज़मीन साझा है: ग्लूकोज़ का बरसों ऊँचा चलना। धूम्रपान, ऊँचा रक्तचाप, मेद और शराब उसी रक्तवाहिका की क्यारी पर अलग से ज़ोर डालते हैं। घिसाव एक दिन में नहीं होता, और एक दिन में वापस भी नहीं जाता।

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गरम लकड़ी के फ़र्श पर हाथ से बुना ऊनी मोज़ा: भूरा शरीर, गुलाबी एड़ी और पंजा; बगल में सलाई और ऊन का गोला पड़ा है।पैर इतने अहम क्यों हैं?मधुमेह में पैरों को अलग शीर्षक गिने जाने की वजह दूरी नहीं, दर्द के अलार्म का चुप हो जाना है। दर्द एक चेतावनी तंत्र है; वह तंत्र कुंद पड़े तो एक छोटा घाव बढ़ते समय ख़बर नहीं देता। संवेदना का खोना, बहाव का घटना और संक्रमण की तरफ़ झुकाव एक पर एक चढ़ें तो तस्वीर भारी हो जाती है। · 3 मिनटआगे पढ़ें

दर्द बुरा मेहमान लगता है। पर उसका असली काम बचाना है। गरम सतह पर पैर पड़ते ही उसे पीछे खींचने वाली चीज़ वही है। मधुमेह में यह संवेदना कुंद पड़े तो पीछे खींचना भी देर से होता है। शरीर नुक़सान ले लेता है, ख़बर नहीं लेता। दिशानिर्देश इस हालत को बचाने वाली संवेदना का खोना कहते हैं और उसे पैर के घाव के जोखिम का मुख्य निशान मानते हैं।

नुक़सान का बड़ा हिस्सा एक हादसे से नहीं निकलता। उसी एक बिंदु पर बार-बार पड़ने वाला दबाव चमड़ी को मोटा करता है, कड़ा घट्टा बनता है, और घट्टा ख़ुद किसी बाहरी चीज़ की तरह बर्ताव करने लगता है। उसके नीचे का ऊतक दब जाता है; पहले भीतर एक ख़ामोश रक्तस्राव और फिर एक खुला घाव उभरता है। तंग जूता इस ज़ंजीर को हफ़्तों में बना देता है।

  • तंग या नए जूते का किनारा: संवेदना घटे तो जूते का कसना भाँपा नहीं जाता।
  • भीतर चला गया कोई छोटा कंकड़ या मुड़ी हुई सिलाई: वह पूरे दिन वहीं रह जाता है।
  • नंगे पैर चलना: घर के भीतर और बाहर, दोनों वही जोखिम ढोते हैं।
  • गरम पानी में जाता या हीटर के पास जाता पैर: चमड़ी जलती है और गरमी महसूस नहीं होती।
  • सूखी और फटी चमड़ी: दरार चमड़ी के नीचे खुलने वाला एक दरवाज़ा है।

अकेली संवेदना का खोना घाव नहीं बनाता। और चीज़ें भी चाहिए। शोध दिखाते हैं कि घावों के बड़े हिस्से में तीन चीज़ें एक साथ आती हैं: नस का नुक़सान, पैर की शक्ल में कोई बदलाव, और एक छोटी चोट। पैर की शक्ल बदले तो दबाव तलवे की उन जगहों पर खिसक जाता है जिनकी उसे आदत नहीं; इस बदलाव को खड़ा करने वाली नस की तरफ़ न्यूरोपैथी वाला लेख बताता है। बरसों से वही नाप पहनने वाला पैर अब वही पैर नहीं रहा।

खुले घाव में दो और कारक मैदान में आ जाते हैं: टाँग की वाहिकाओं का तंग होना और संक्रमण। ये भरने में देर क्यों कराते हैं, इसे घाव वाला लेख उठाता है। पैर पर पड़ने वाला बोझ भी एक कारक है। धड़ का वज़न हर क़दम पर उसी जगह उतरता है, और दिशानिर्देश पैर को बोझ से मुक्त करने पर इसीलिए ज़ोर देते हैं। इस तस्वीर में भी चेतावनी दर्द से नहीं आती; बिगड़ने को घाव के चारों ओर की चमड़ी दिखाती है।

ज़ंजीर की पहली कड़ी एक छोटा बदलाव है। वह महसूस नहीं होता। संवेदना ख़बर न दे तो ख़बर आँख को देनी पड़ती है। दिशानिर्देश पैरों की शिक्षा पर जो ज़ोर देते हैं उसकी वजह यही है: हर दिन पैर देखने वाली एक आँख, चुप हो चुके अलार्म की जगह ले लेती है। देखने की जगह सिर्फ़ तलवा नहीं; उँगलियों के बीच, एड़ी और नाख़ून के किनारे भी तस्वीर में आते हैं। जो अपना पैर ख़ुद नहीं देख पाता, उसके लिए आईना या पास का कोई व्यक्ति वही काम कर देता है।

दिशानिर्देश जिसे घाव से पहले का बदलाव कहते हैं, वह आँख से पहचाना जाता है: मोटा होता घट्टा, घट्टे के नीचे गहराता कोई धब्बा, पानी का भर आना, कोई गहरी दरार। नाख़ून के किनारे की लाली, दोनों पैरों के बीच रंग या सूजन का फ़र्क़ भी उसी समूह में आते हैं। ये अभी खुला घाव नहीं, खुले घाव के अग्रदूत हैं। चमड़ी सलामत रहते दिखा बदलाव, चमड़ी खुल जाने के बाद दिखे बदलाव जैसी चीज़ नहीं है।

पैरों की जाँच का मधुमेह की निगरानी में एक पक्की मद होना इसी से बनता है। जाँच ख़ुद इस लेख का विषय नहीं; छोटे में कहें तो चमड़ी, नाड़ी और बचाने वाली संवेदना देखी जाती है। सड़क पर चली गई दूरी, घर में नंगे पैर बीते घंटे और नहाने के बाद के कुछ मिनट: तस्वीर को रोज़मर्रा में जगह देने वाली जगहें ये हैं।

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पेड़ के तने पर छाल के छिल जाने की खड़ी पट्टी; उसके नीचे से क्रीम रंग की ताज़ा लकड़ी दिखती है, पीछे धुँधली बर्फ़ है।घाव देर से क्यों भरते हैं?भरना कोई एक घटना नहीं, क्रम से चलने वाली एक ज़ंजीर है, और ऊँचा ग्लूकोज़ इस ज़ंजीर की कड़ियाँ एक-एक करके धीमी कर देता है। ख़ून बहना रुकता है, सफ़ाई शुरू होती है, नई वाहिका बुनी जाती है, कोलेजन बिछता है। मधुमेह में इस क्रम की एक से ज़्यादा जगहों पर अड़चन होती है। · 3 मिनटआगे पढ़ें

चमड़ी बंद होते समय चार टोलियाँ क्रम से काम करती हैं। पहले ख़ून बहना रुकता है और थक्का सतह को ढक देता है। फिर सफ़ाई की टोली आती है: बचाव की कोशिकाएँ मरा हुआ ऊतक और कीटाणु समेटती हैं। उसके बाद बनाने वाली टोली नई केशिकाएँ बुनती है और ख़ाली जगह ताज़े ऊतक से भरती है। सबसे आख़िर में कोलेजन दोबारा सजता है, और घाव की जगह हफ़्तों तक सख़्त होकर ताक़त पाती है।

पहली अड़चन सफ़ाई के पायदान पर है: ऊँचा ग्लूकोज़ बचाव की कोशिकाओं के घाव तक जाने और कीटाणु निगलने के हुनर को कमज़ोर करता है। साथ ही यह चरण ख़त्म ही नहीं होता; सूजन की कोशिकाएँ अपनी जगह बनी रहती हैं और अगली टोली को जगह नहीं देतीं। घाव आगे नहीं बढ़ता। वह पहले पायदान पर अटक जाता है।

दूसरी अड़चन वाहिका बुनने के पायदान पर है: नया ऊतक तभी पोसा जाता है जब उसके पास कोई केशिका हो, क्योंकि ऑक्सीजन बहुत छोटी दूरी तक ढोई जाती है। मधुमेह में वाहिका की भीतरी सतह घिस चुकी होती है और नई वाहिका बुलाने वाले संकेत कमज़ोर निकलते हैं। टाँग की वाहिकाएँ भी तंग हों तो उस इलाक़े तक पहुँचने वाला खून पहले ही कम है। दोनों कमियाँ एक पर एक चढ़ती हैं। ऊतक ऑक्सीजन से वंचित रह जाता है।

भरने का पायदानसामान्य में क्या होता हैमधुमेह में क्या अटकता है
ख़ून बहना रुकनाथक्का सतह बंद कर देता हैथक्का बनता है; अड़चन अगले पायदानों पर शुरू होती है
सफ़ाईबचाव की कोशिकाएँ मरा ऊतक समेटती हैंकोशिकाएँ देर से आती हैं, सूजन अपनी जगह बनी रहती है
बनानाकेशिका जाली बुनी जाती है, कोलेजन ख़ाली जगह भरता हैवाहिका बुलाने वाला संकेत कमज़ोर पड़ता है, कोलेजन घटता है, तोड़ने वाले एंज़ाइम बढ़ते हैं
मज़बूत होनाघाव की जगह ताक़त पाती हैबंद हुई सतह ज़्यादा आसानी से खुल जाती है

तीसरी अड़चन बनाने के माल में है; कोलेजन बनाने वाली कोशिकाएँ धीमे काम करती हैं और जो ऊतक निकलता है वह कम भी है और बेतरतीब भी। उसी समय ऊतक को खोलने वाले एंज़ाइम अतिरिक्त मेहनत करते हैं, और बनाने तथा तोड़ने के बीच का संतुलन तोड़ने की तरफ़ खिसक जाता है। बंद हुई सतह भी पहले जितनी मज़बूत नहीं होती; उसी जगह का दोबारा खुलना इसीलिए अकसर दिखता है।

इन अड़चनों का जोड़ समय का नुक़सान है, और समय कीटाणुओं के फ़ायदे में जाता है। खुला रहने वाला हर दिन बसने के लिए एक अतिरिक्त मौक़ा है; जमा होती परत दवा के ऊतक तक पहुँचने को भी कठिन कर देती है। रसोई में लगा कोई कट या बग़ीचे में घुसा कोई काँटा, स्वस्थ चमड़ी पर एक हफ़्ते का काम है। वही घाव मधुमेह में हफ़्तों खुला रहता है।

अपनी दिशा खो चुके घाव के अपने निशान हैं: लाली का किनारे से बाहर फैलना, सूजन, छूने पर बढ़ती गरमी, रिसाव और गंध। ये यह नहीं कहते कि भरना रुक गया, बल्कि यह कहते हैं कि वह उलट गया है। समय का पैमाना भी इस तस्वीर का हिस्सा है। लाली की सीमा घंटों में चौड़ी हो रही हो तो घाव अगली मुलाक़ात का विषय नहीं रह जाता; तात्कालिकता वाला लेख इसे उसी दिन आँके जाने वाले निशानों में गिनता है। जिस पैर में नस का नुक़सान है, वहाँ इस तस्वीर के साथ दर्द न भी हो; दर्द का न होना तस्वीर को हलका नहीं करता। पैर पूरे के पूरे क्यों आगे आता है, यह इस पन्ने का विषय नहीं। उस सवाल का जवाब “पैर इतने अहम क्यों हैं?” शीर्षक में है।

ज़ंजीर की हर कड़ी पर वही ज़मीन है: ग्लूकोज़ का लंबे समय ऊँचा चलना। कोलेजन सख़्त होता है, वाहिका की भीतरी सतह घिसती है, बचाव की कोशिकाएँ धीमी पड़ती हैं। धूम्रपान और बहाव की दिक़्क़त उसी दिशा में धकेलते हैं। इसीलिए किसी घाव की चाल सिर्फ़ घाव को देखकर नहीं पढ़ी जाती; काग़ज़ की कटन जितनी छोटी खुली जगह भी उसी ज़मीन पर खड़ी है।

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यह लेख सिर्फ़ जानकारी के लिए है; यह न रोग की पहचान है, न इलाज या मात्रा का निर्देश। आपके इलाज का फ़ैसला हमेशा वह होता है जो आप अपने डॉक्टर के साथ मिलकर लेते हैं।

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