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मधुमेह क्या है?

मधुमेह के प्रकार

6 लेख

जंगल में मिट्टी की एक पगडंडी दो हिस्सों में बँट रही है; दोनों शाखाएँ एक-दूसरे से दूर जाकर पेड़ों के बीच ओझल हो जाती हैं।टाइप 1 और टाइप 2 में फ़र्क़ क्या है?टाइप 1 मधुमेह में प्रतिरक्षा तंत्र इंसुलिन बनाने वाली कोशिकाओं को मिटा देता है; टाइप 2 में इंसुलिन होता तो है पर अपना काम नहीं कर पाता। एक में बनना रुकता है, दूसरे में इस्तेमाल अटकता है। यही फ़र्क़ बताता है कि इलाज, रफ़्तार और उम्र अलग क्यों दिखते हैं। आँकड़ा दोनों में चढ़ता है, कहानी अलग है। · 2 मिनटआगे पढ़ें

इंसुलिन वह चाबी है जो खून के ग्लूकोज़ को कोशिकाओं तक पहुँचाती है। उस चाबी के बिना शक्कर खून में जमा होती है। टाइप 1 मधुमेह में प्रतिरक्षा तंत्र इस चाबी को बनाने वाली अग्न्याशय की कोशिकाओं को पराया समझकर मिटा देता है। बनना ख़त्म हो जाता है। इंसुलिन बाहर से देना पहले ही दिन से ज़रूरी हो जाता है। टाइप 2 में चाबी बनती है, पर ताला जंग खा चुका होता है: माँसपेशी और यकृत की कोशिकाएँ इंसुलिन को पहले जितना जवाब नहीं देतीं। अग्न्याशय बरसों तक ज़्यादा इंसुलिन छोड़कर कमी भरता है, फिर यह रफ़्तार नहीं सँभाल पाता। एडीए के देखभाल मानक पहले को प्रतिरक्षा से हुआ कोशिका-नाश कहते हैं और दूसरे को धीरे-धीरे बढ़ती स्राव की कमी जिसकी जड़ प्रतिरक्षा में नहीं है।

फ़र्क़टाइप 1टाइप 2
जड़ में क्याप्रतिरक्षा तंत्र इंसुलिन बनाने वाली कोशिकाओं को मिटा देता है।कोशिकाएँ इंसुलिन का विरोध करती हैं, अग्न्याशय समय के साथ पीछे रह जाता है।
शुरुआतलक्षण दिनों या हफ़्तों में फूट पड़ते हैं।लक्षण बरसों तक चुपचाप आगे बढ़ते हैं।
इंसुलिनपहले ही दिन से बाहर से देना ज़रूरी है।आम तौर पर बरसों बाद बात आती है।

पर इतना साफ़ दिखने वाला यह फ़र्क़ उलझता क्यों है? बहुत समय तक यही ढाँचा पढ़ाया गया: टाइप 1 बच्चों में निकलता है, टाइप 2 बड़ों में। एडीए इस ढाँचे को खुले तौर पर ग़लत मानता है; दोनों रोग हर उम्र में दिखते हैं, और बड़ी उम्र में शुरू होने वाला प्रतिरक्षा-जड़ वाला मधुमेह पहली नज़र में दूसरे जैसा लगता है। वज़न भी भरोसे का पैमाना नहीं है। फ़र्क़ करने वाली चीज़ न उम्र है, न शरीर। वह कहीं और है। वह खून में खोजे जाने वाले प्रतिरक्षा चिह्न हैं और अग्न्याशय में बची हुई बनाने की ताक़त।

प्रकार का नाम जिज्ञासा का मामला नहीं, दिशा का मामला है।

इनमें ज़्यादा ख़तरनाक कौन-सा है?
इसका एक जवाब नहीं है, क्योंकि जोखिम प्रकार से नहीं बल्कि इससे तय होता है कि शक्कर बरसों तक कहाँ ठहरी। प्रतिरक्षा-जड़ वाले में अचानक गिरावट नज़दीकी निगरानी माँगती है, दूसरे में पहचान देर से होने पर चुपचाप बरस जमा हो जाते हैं।
मधुमेह कितने प्रकार का होता है?
एडीए चार मुख्य समूह गिनाता है: प्रतिरक्षा-जड़ वाला प्रकार, प्रतिरोध-जड़ वाला प्रकार, गर्भावस्था में उभरने वाला मधुमेह, और एकल जीन की गड़बड़ी या अग्न्याशय के रोग जैसी दूसरी वजहों से बनने वाले रूप।
क्या टाइप 2 बदलकर टाइप 1 बन जाता है?
नहीं, ये एक ही रोग के चरण नहीं बल्कि दो अलग सिलसिले हैं। प्रतिरोध-जड़ वाले मधुमेह में किसी दिन इंसुलिन की सुई ज़रूरी होना प्रकार बदलने का मतलब नहीं रखता; इसका मतलब है कि अग्न्याशय का अपना बनाना घट गया।
बोलचाल का छिपा हुआ शुगर किस प्रकार में आता है?
छिपा हुआ शुगर रोज़मर्रा की भाषा में प्री-डायबिटीज़ है: ब्लड शुगर सामान्य से ऊपर, पहचान की दहलीज़ से नीचे। दिशानिर्देश उस दहलीज़ को खाली पेट के माप, शुगर लोड टेस्ट और HbA1c पर अलग-अलग तय करते हैं; प्री-डायबिटीज़ इन्हीं दहलीज़ों के ठीक नीचे की पट्टी है।

आगे: मधुमेह किन जाँचों से पहचाना जाता है?

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ख़ाली कक्षा में डेस्क पर रखा बस्ता और बंद पेंसिल बॉक्स, खिड़की से आती दोपहर बाद की रोशनी में नहाए हुए।टाइप 1 मधुमेह क्या है, क्यों होता है?टाइप 1 मधुमेह तब उभरता है जब प्रतिरक्षा तंत्र ग़लती से अग्न्याशय की इंसुलिन बनाने वाली कोशिकाओं को निशाना बना लेता है। बची हुई कोशिकाएँ ज़रूरत पूरी नहीं करतीं और खून का ग्लूकोज़ चढ़ जाता है। इसका मीठा खाने या जीवनशैली से कोई नाता नहीं; सिलसिला बरसों पहले शुरू होता है। · 2 मिनटआगे पढ़ें

अग्न्याशय के भीतर द्वीप कहलाने वाले कोशिका-समूह होते हैं और इन द्वीपों के बीच बैठी बीटा कोशिकाएँ इंसुलिन बनाती हैं। टाइप 1 मधुमेह में प्रतिरक्षा तंत्र इन कोशिकाओं को पराया समझ लेता है और एक-एक करके मिटा देता है। स्वप्रतिरक्षी प्रतिक्रिया यही है। बीटा कोशिकाओं का बड़ा हिस्सा चला जाए तो इंसुलिन का बहाव रुक जाता है, खून की शक्कर लक्ष्य दायरे से ऊपर निकल जाती है और वहीं ठहर जाती है।

शुरुआत में एक से ज़्यादा कारक साथ आते हैं। ऊतक-मेल के जीन जोखिम बढ़ाते हैं; पर ये जीन रखने वालों में से ज़्यादातर को यह रोग कभी नहीं होता। आनुवंशिकता का हिस्सा संख्याओं के साथ बताने वाला एक अलग लेख है। शोध पर्यावरण के उकसाने वाले कारण खोज रहा है; एंटरोवायरस इस सूची में सबसे ज़्यादा जाँचे गए उम्मीदवार हैं, फिर भी कोई पक्का उकसाने वाला कारण नहीं दिखाया गया। शक्कर का सेवन, वज़न या जीवनशैली इस तस्वीर की वजह नहीं हैं।

यह कितनी बार दिखता है, यह देश-देश में साफ़ फ़र्क़ के साथ बदलता है; उत्तरी यूरोप में सबसे ऊँचा और पूर्वी एशिया में सबसे नीचा नापा जाता है। मधुमेह वाले लोगों में टाइप 1 एक छोटा हिस्सा घेरता है।

यह विनाश किसी एक सुबह शुरू नहीं होता। खून के स्वप्रतिपिंड, जैसे एंटी-GAD, कोई शिकायत न रहते हुए भी बरसों पहले दिख जाते हैं। दिशानिर्देश इस सिलसिले को तीन चरणों में बाँधते हैं:

  1. प्रतिरक्षा का हमला शुरू होता है। स्वप्रतिपिंड खून में दिखते हैं, ब्लड शुगर सामान्य चलता है, व्यक्ति को कुछ महसूस नहीं होता।
  2. बीटा कोशिकाओं का नुक़सान आगे बढ़ता है। ब्लड शुगर लक्ष्य दायरे से बाहर खिसकने लगता है, शिकायत तब भी नहीं होती।
  3. बची हुई कोशिकाएँ काफ़ी नहीं पड़तीं। प्यास, बार-बार पेशाब, वज़न घटना और थकान सामने आते हैं; पहचान अकसर इसी चरण पर होती है।

लक्षण तेज़ी से आते हैं। स्कूल का बस्ता अचानक भारी हो गया-सा लगता है, रात की प्यास नींद तोड़ती है, और नाश्ते के बाद भी थकान नहीं जाती। पॉलीडिप्सिया और पॉलीयूरिया, यानी बहुत ज़्यादा प्यास और बार-बार पेशाब, इस तस्वीर की सबसे दिखने वाली जोड़ी हैं। बच्चों में तस्वीर कीटोएसिडोसिस से खुल सकती है; यह पन्ना उस आपात तस्वीर के निशानों में नहीं जाता, वे “मधुमेह के पहले लक्षण क्या हैं?” शीर्षक में क़तार से रखे हैं।

उम्र की कोई सीमा नहीं है। बड़ों में विनाश धीमे बढ़ता है इसलिए तस्वीर चुपचाप खुलती है, और इस धीमे रूप को LADA नाम से जाना जाता है। यह तस्वीर शुरू में टाइप 2 मधुमेह जैसी दिखती है। फ़र्क़ दो मापों से साफ़ होता है; एंटी-GAD प्रतिपिंड प्रतिरक्षा के हमले का निशान दिखाता है, और C-पेप्टाइड बताता है कि अग्न्याशय के अपने इंसुलिन बनाने में कितना बचा है।

जो अकसर सुना जाता हैजो जाना गया है
यह बचपन का रोग हैपहचान सबसे ज़्यादा बचपन और युवावस्था में होती है; बड़ी उम्र में शुरू होने वाला टाइप 1 भी है
बहुत मीठा खाने से होता हैखान-पान विनाश शुरू नहीं करता; वजह स्वप्रतिरक्षी सिलसिला है
इसका नाता मोटापे से हैपहचान से पहले वज़न घटना आम है; यह वजह नहीं नतीजा है
यह टाइप 2 का भारी रूप हैअलग रोग; तंत्र इंसुलिन प्रतिरोध नहीं, इंसुलिन का न होना है

पहचान के पल पहला भाव हैरानी होता है; जबकि कोई एक शाम कुछ ग़लत खाकर टाइप 1 मधुमेह नहीं हो जाता। पहचान के बाद बची हुई बीटा कोशिकाएँ कुछ समय और काम करती हैं; हनीमून काल कहे जाने वाले इस अंतराल में बाहर से दी जाने वाली इंसुलिन की ज़रूरत नीची चलती है। अंतराल बंद होते ही ज़रूरत फिर चढ़ जाती है। स्वप्रतिरक्षी सिलसिला पीछे रुकता नहीं, इसलिए वह अंतराल टिकाऊ नहीं है।

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प्रतीक्षा वाले गलियारे में दीवार के साथ क़तार में लगी ख़ाली प्लास्टिक कुर्सियाँ; बगल की खिड़की से आती क़ुदरती रोशनी गलियारे के धुँधले सिरे की ओर कमज़ोर पड़ती जाती है।टाइप 2 मधुमेह क्या है, कैसे बनता है?टाइप 2 मधुमेह में दो चीज़ें एक साथ चलती हैं: कोशिकाएँ इंसुलिन को पहले जैसा जवाब नहीं देतीं, और अग्न्याशय भी कुछ समय बाद कमी नहीं भर पाता। मधुमेह का सबसे आम रूप यही है। बनने में बरसों लगते हैं। शक्कर चढ़ती रहती है पर लक्षण चुप रहते हैं; तस्वीर अकसर किसी और वजह से कराई गई जाँच में दिखती है। · 2 मिनटआगे पढ़ें

टाइप 2 मधुमेह वह क़िस्म है जो मधुमेह वाले ज़्यादातर लोगों में दिखती है। इंसुलिन बनना पूरी तरह रुकता नहीं, कम पड़ जाता है। गड़बड़ी की जगह भी दो हैं। एक तरफ़ इंसुलिन प्रतिरोध, दूसरी तरफ़ अग्न्याशय का इस ज़्यादा उत्पादन को लंबे समय तक न सँभाल पाना। प्रतिरोध कोशिका के स्तर पर कैसे बनता है, यह “इंसुलिन प्रतिरोध क्या है?” खोलता है। खून की शक्कर चढ़ने के लिए दोनों का साथ होना ज़रूरी है; अकेला प्रतिरोध यह तस्वीर नहीं बनाता।

यह तस्वीर एक दिन में नहीं बनती; सीढ़ियाँ यों चढ़ती हैं:

  1. प्रतिरोध जम जाता है, उसी काम के लिए ज़्यादा इंसुलिन चाहिए होता है।
  2. अग्न्याशय ज़्यादा छोड़ता है; कमी भर जाने से जाँच साफ़ दिखती है।
  3. बीटा कोशिकाओं की यह अतिरिक्त मेहनत जारी रखने की ताक़त धीरे-धीरे घटती है।
  4. उत्पादन माँग पूरी नहीं करता; शक्कर पहले भोजन के बाद, फिर नाश्ते से पहले भी चढ़ने लगती है।
  5. मान पहचान की दहलीज़ पार कर जाएँ तो तस्वीर का नाम टाइप 2 मधुमेह है।

पहली सीढ़ियाँ चुपचाप बीतती हैं। बीटा कोशिकाओं की स्राव-शक्ति में गिरावट पहचान से पहले के बरसों तक जाती है। जबकि रसोई में, काम पर और नींद में कुछ नहीं बदलता। विश्व स्वास्थ्य संगठन बताता है कि टाइप 2 मधुमेह में लक्षण हलके चलते हैं और पहचान शुरुआत के बरसों बाद हो पाती है। अकेला एक ऊँचा नतीजा पहचान के लिए काफ़ी नहीं। अमेरिकन डायबिटीज़ एसोसिएशन के पैमानों में तस्वीर दूसरी जाँच से या किसी और दिन की जाँच से पक्की होती है।

यह तस्वीर लंबे समय तक अधेड़ उम्र के बाद की परेशानी मानी गई। आज यह युवा बड़ों में और स्कूल जाने वाले बच्चों में भी दिखती है; वज़न का बढ़ना, बिना हिले-डुले बीतने वाला दिन और भारी कैलोरी वाला खान-पान इस बदलाव के पीछे गिनाए जाने वाले शीर्षकों में हैं। वही दिशानिर्देश छानबीन को उन बड़ों में भी सामने लाता है जिनमें लक्षण नहीं हैं। अतिरिक्त वज़न और उसके साथ जुड़ा कोई जोखिम शीर्षक हो तो बारी पहले आती है। झुकाव तय करने वाले शीर्षक एक-दूसरे पर चढ़कर काम करते हैं। इस ढेर में परिवार के इतिहास का हिस्सा कितना है? संख्याओं के साथ ब्योरा “क्या मधुमेह परिवार से आता है?” पन्ने पर है।

कारकवह किस तरह भूमिका निभाता है
उम्रअधेड़ उम्र के बाद बारंबारता साफ़ तौर पर बढ़ती है
परिवार का इतिहासआनुवंशिक झुकाव के शीर्षकों में से एक
वज़न और कमर का घेराअतिरिक्त वज़न और चौड़ा कमर-नाप जोखिम शीर्षकों में गिने जाते हैं
बिना हिले-डुले बीतता दिनकम हिलना जोखिम शीर्षकों में है; काम करती माँसपेशी खून की शक्कर इस्तेमाल करती है
गर्भावस्था में मधुमेह का इतिहासगर्भावस्था में दिखी तस्वीर प्रसव के बाद भी देखी जाती है

तालिका की आख़िरी क़तार का ब्योरा गर्भावस्था के मधुमेह वाले लेख में है। टाइप 2 मधुमेह वह तस्वीर नहीं जिसमें इंसुलिन बनना ख़त्म हो गया हो; यह वह तस्वीर है जिसमें बनना बढ़ती माँग तक नहीं पहुँच पाता। यही फ़र्क़ इलाज की तरतीब को भी गढ़ता है: अग्न्याशय अब भी स्राव करता है, इसलिए शुरुआती दौर में मुँह से ली जाने वाली दवाएँ और दिन की तरतीब आगे रहती हैं। स्राव की ताक़त बरसों में घटती है तो ख़ाका बदल जाता है। लोगों के बीच रफ़्तार का फ़र्क़ भी इसीलिए बड़ा है।

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भाप से धुँधले हुए खिड़की के काँच के पीछे इतनी बिखरी हुई रोशनी कि सड़क के लैंप की रेखाएँ पहचानी नहीं जातीं, काँच की सतह पर संघनन की बूँदें।प्री-डायबिटीज़ क्या है, छिपा शुगर क्या?छिपा हुआ शुगर उसी हालत का रोज़मर्रा वाला नाम है जिसे चिकित्सा में प्री-डायबिटीज़ कहते हैं। ब्लड शुगर सामान्य से ऊपर है, पर मधुमेह की पहचान जहाँ से शुरू होती है उस सीमा से नीचे। इस पट्टी में प्यास या वज़न घटने जैसे जाने-पहचाने निशान किसी को चेताते नहीं। नाम भी यहीं से आया; तस्वीर सिर्फ़ जाँच में दिखती है। · 2 मिनटआगे पढ़ें

रोज़मर्रा की भाषा में शुगर की शुरुआत कहलाने वाली तस्वीर भी यही है। सीमा पर शुगर भी यही है। दोनों मुहावरे किसी शुरू हो चुके रोग को नहीं, उस पट्टी को बताते हैं जहाँ जोखिम बढ़ा हुआ है। आगे लगा उपसर्ग ख़ुद कह देता है कि दहलीज़ अभी लाँघी नहीं गई।

पट्टी का महसूस न होना, इसकी एक ठोस वजह है। प्यास और बार-बार पेशाब तब उभरते हैं जब शक्कर गुर्दे की दहलीज़ पार करके पेशाब में रिसने लगती है। प्री-डायबिटीज़ की पट्टी वाली बढ़त इस दहलीज़ से नीचे रहती है। इसलिए न पानी का नुक़सान शुरू होता है, न उसके पीछे आने वाली प्यास। नाश्ता, काम का दिन और शाम की सैर उसी एहसास के साथ बीतते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन इस पायदान को सामान्य और मधुमेह के बीच की संक्रमण अवस्था कहकर परिभाषित करता है।

अकेला एक माप काफ़ी नहीं। तीन अलग खिड़कियाँ इस पट्टी को अलग-अलग तरफ़ से पकड़ती हैं। खिड़कियों के नतीजे आपस में अलग हो जाते हैं: एक सीमा पर निकलता है जबकि दूसरा सामान्य रहता है।

जो माप देखा जाता हैवह क्या पकड़ता हैनिशान का नाम
खाली पेट का प्लाज़्मा ग्लूकोज़रात भर बिना खाए बीतने के बाद सुबह का स्तरबिगड़ा हुआ खाली पेट ग्लूकोज़
OGTT (मीठा घोल पीने के बाद का माप)बोझ के बाद शक्कर कितनी देर से उतरती हैबिगड़ी हुई ग्लूकोज़ सहनशीलता
HbA1cबीते हफ़्तों की औसत चालसीमा पर HbA1c

यही नाम गर्भावस्था में कराए जाने वाले शुगर लोड टेस्ट का भी है। वह जाँच गर्भावस्था के दौर की अपनी एक अलग तस्वीर खोजती है, यानी गर्भावस्था का मधुमेह। शब्द साझा है। विषय अलग है।

इस पट्टी के पीछे इंसुलिन प्रतिरोध और बीटा कोशिकाओं की भरपाई साथ-साथ चलते हैं; यह जोड़ी कैसे बनती है और बरसों तक क्यों नहीं भाँपी जाती, इस पर एक अलग लेख है।

असली सवाल यह है: क्या यह तस्वीर मधुमेह में बदल जाती है? दिशा एक नहीं है। अलग-अलग महाद्वीपों के उन्नीस समूह जोड़कर एक विश्लेषण किया गया। दस साल के क़रीब की निगरानी में जिनका ब्लड शुगर सामान्य पर लौटा, उनका अनुपात मधुमेह की ओर जाने वालों से साफ़ ज़्यादा निकला।

उसी विश्लेषण में खाली पेट का मान सबसे ऊँची पट्टी में हो तो तस्वीर उलट जाती है; वहाँ जाना आगे आ जाता है। प्री-डायबिटीज़ इसीलिए कोई ठहरा हुआ पड़ाव नहीं, खुली दिशा वाला एक अंतराल है।

अभिलेखों में दोनों दिशाओं के साथ गिनाए जाने वाले शीर्षक ये हैं:

  • शुरुआती स्तर: पट्टी के निचले सिरे के पास वाले नतीजों में सामान्य पर लौटना ज़्यादा दिखता है।
  • अतिरिक्त वज़न: कमर के नाप के अनुपातों के साथ, सामान्य पर लौटने की संभावना घटाने वाले शीर्षकों में गिना जाता है।
  • उम्र: बड़ी उम्र टाइप 2 मधुमेह की दिशा के साथ गिनाई जाती है।
  • घटाया गया वज़न: जीवनशैली के अध्ययनों में सामान्य पर लौटने की भविष्यवाणी करने वाले शीर्षकों में सबसे आगे है।

प्री-डायबिटीज़ किसी एक नतीजे का लेबल नहीं है। यह चाल का नाम है। दिशानिर्देश इसीलिए पट्टी के भीतर रहने वाले व्यक्ति में माप को साल में कम से कम एक बार दोहराने की सलाह देते हैं। दो नतीजों के बीच का फ़र्क़ एक सादे आँकड़े के कहे से ज़्यादा बताता है।

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धातु के दरवाज़े के ताले का बहुत पास से लिया गया चित्र; चाबी छेद में घुसी है पर टेढ़ी बैठी होने से घूमी नहीं, फ़्रेम में कोई पहचानने लायक़ चेहरा, पढ़ा जाने वाला अंक या ब्रांड नहीं।इंसुलिन प्रतिरोध क्या है?इंसुलिन प्रतिरोध वह हालत है जिसमें कोशिका का दरवाज़ा खोलने वाले इंसुलिन के संकेत को पहले जितना जवाब नहीं मिलता। जब तक अग्न्याशय ज़्यादा स्राव से कमी भरता रहे, ब्लड शुगर सामान्य तक दिख सकता है; तस्वीर इसीलिए बरसों बिना भाँपे रह जाती है। यह नामित रोग से ज़्यादा वह ज़मीन है जिस पर मधुमेह उगता है। · 2 मिनटआगे पढ़ें

यहाँ प्रतिरोध शब्द ज़िद या ग़लती नहीं बताता। इसका मतलब है कि कोशिका उसी संकेत से पहले से कम काम निकाल रही है। यह कठिनाई सबसे ज़्यादा माँसपेशी और यकृत में दिखती है: संकेत सामने खड़ा है, दरवाज़ा मुश्किल से खुलता है। अग्न्याशय इस कठिनाई को भाँपकर स्राव बढ़ा देता है। ताला आख़िरकार घूम जाता है, पर ख़र्च हुई ताक़त पहले से ज़्यादा है।

पहली हरकत भोजन के बाद निकलती है। खाली पेट का प्लाज़्मा ग्लूकोज़ बरसों चुप रहता है, जबकि नाश्ते या रात के खाने के बाद का शुगर उम्मीद से ऊपर चढ़ जाता है और उतरने में देर लगाता है। बीटा कोशिकाएँ यह अतिरिक्त मेहनत न सँभाल पाएँ तो तस्वीर प्री-डायबिटीज़ या टाइप 2 मधुमेह की तरफ़ खिसक जाती है। प्रतिरोध पहचान से बहुत पहले शुरू होता है, इसीलिए मधुमेह की ख़बर अचानक आती है।

जिसे देखा जाता हैइंसुलिन प्रतिरोधमधुमेह
वह क्या बताता हैकोशिकाओं का इंसुलिन संकेत को जवाब घट गया हैब्लड शुगर का पहचान की दहलीज़ पार कर जाना
ब्लड शुगरसामान्य, सीमा पर या ऊँचापहचान की दहलीज़ के ऊपर
कैसे समझा जाता हैनैदानिक तस्वीर और परोक्ष संकेतग्लूकोज़ और HbA1c के माप
क्या यह नामित पहचान हैनहीं, यह एक ज़मीन हैहाँ, एक परिभाषित रोग

खून की जाँच में इंसुलिन का ऊँचा निकलना यह सवाल मन में लाता है। वह नतीजा अग्न्याशय के ज़्यादा काम करने का निशान है, अकेले कोई पहचान का अंक नहीं। इंसुलिन नापने वाली व्यावसायिक जाँचों के बीच फ़र्क़ बड़ा है: वही नमूना दूसरी विधि में दूसरा नतीजा देता है। व्यावसायिक विधियों की तुलना करने वाली एक मानकीकरण रिपोर्ट ने इस उतार-चढ़ाव को टिकाऊ माप के रास्ते की रुकावट माना। दुनिया भर के दिशानिर्देश इसीलिए पहचान को इंसुलिन के स्तर पर नहीं, ग्लूकोज़ और HbA1c के मापों पर टिकाते हैं।

प्रतिरोध का सीधा माप सिर्फ़ शोध में निकलता है: नस के रास्ते इंसुलिन देते हुए ब्लड शुगर को स्थिर रखने वाली क्लैंप विधि। इस विधि में घंटों लगते हैं और अलग टीम चाहिए; यह ओपीडी के दिन में नहीं समाती।

प्रतिरोध सिर्फ़ शक्कर से बात नहीं करता; उसी ज़मीन पर और भी निशान अकसर मिलते हैं:

  • यकृत में चर्बी का जमा होना
  • मेद प्रोफ़ाइल का बिगड़ना
  • रक्तचाप का ऊँचा होना
  • बहुपुटीय अंडाशय सिंड्रोम
  • गर्दन और बग़ल की सिलवटों में गहरी और मख़मली पड़ती त्वचा
क्या छिपा हुआ शुगर और इंसुलिन प्रतिरोध एक ही चीज़ हैं?
छिपा हुआ शुगर उस हालत का रोज़मर्रा वाला नाम है जिसमें ब्लड शुगर सामान्य से ऊपर है पर मधुमेह की दहलीज़ तक नहीं पहुँचा। इंसुलिन प्रतिरोध उससे चौड़ी ज़मीन है; वह तब भी मिलता है जब शक्कर पूरी तरह सामान्य हो।
अगर इंसुलिन प्रतिरोध है तो क्या मधुमेह पक्का है?
पक्का नहीं। प्रतिरोध जोखिम बड़ा करता है, नतीजा नहीं लिखता। जब तक अग्न्याशय माँग पूरी करता रहे, ब्लड शुगर पहचान की दहलीज़ से नीचे रहता है।

यहाँ माँसपेशी का हिस्सा निर्णायक है। इंसुलिन जिस ग्लूकोज़ को भीतर भेजता है उसका बड़ा भाग कंकाल की माँसपेशी में जाता है। पैदल चलना, काम के दिन में हिलना-डुलना और वज़न का बदलना इसीलिए इंसुलिन के जवाब पर होने वाले शोध के बीच में रहते हैं। प्रतिरोध उम्र भर एक ही स्तर पर नहीं ठहरता। बीटा कोशिकाओं की क्षमता काफ़ी बनी रहे तो ब्लड शुगर पहचान की दहलीज़ कभी नहीं लाँघता।

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सादी मेज़ पर तह किया हुआ हल्के रंग का शिशु कंबल और उस पर बंद रखी एक ख़ाली स्वास्थ्य डायरी; बग़ल से आती नरम रोशनी, कोई चेहरा या पढ़ा जाने वाला अक्षर नहीं।गर्भावस्था का मधुमेह क्या है?गर्भावस्था का मधुमेह यह है कि ब्लड शुगर पहली बार गर्भ के दौरान चढ़ जाए, और ज़्यादातर स्त्रियों में यह प्रसव के बाद लौट जाता है। लौट जाना मामले के बंद हो जाने का मतलब नहीं रखता: आगे के बरसों में टाइप 2 मधुमेह की संभावना ऊँची बनी रहती है। प्रसव के बाद का माप इसीलिए निगरानी का हिस्सा है। · 2 मिनटआगे पढ़ें

गर्भ में नाल कई हार्मोन छोड़ती है और ये हार्मोन इंसुलिन के कोशिकाओं को दिए संकेत को कमज़ोर कर देते हैं। शरीर इसका जवाब ज़्यादा इंसुलिन बनाकर देता है। जब तक अग्न्याशय यह अतिरिक्त बोझ उठा पाता है, ब्लड शुगर अपनी सामान्य चाल बनाए रखता है; जिस बिंदु पर नहीं उठा पाता, वहाँ चढ़ जाता है। दिशानिर्देशों में इस तस्वीर का नाम गर्भकालीन मधुमेह है। इसकी जड़ गर्भावस्था का अपना पैदा किया इंसुलिन प्रतिरोध है; वह प्रतिरोध कोशिका में किन सीढ़ियों से बनता है, यह एक अलग लेख का विषय है।

लक्षण अकेले रास्ता नहीं दिखाते। बहुत प्यास, थकान और बार-बार पेशाब गर्भावस्था में यों भी दिखते हैं, इसलिए वे फ़र्क़ करने वाले नहीं माने जाते। पहचान इसीलिए किसी शिकायत से नहीं, शुगर लोड टेस्ट से निकलती है। छानबीन का समय दिशानिर्देशों में 24 से 28 हफ़्ते है। लोड एक-सीढ़ी वाली तरतीब में एक ही जाँच से होता है, और दो-सीढ़ी वाली में पहले छानबीन फिर पुष्टि से। छानबीन सभी गर्भवतियों के लिए सुझाई जाती है, और ये शीर्षक संभावना को साफ़ तौर पर बढ़ाते हैं:

  • गर्भ से पहले अतिरिक्त वज़न होना
  • ऐसी रोज़मर्रा तरतीब जिसमें हिलना-डुलना कम हो
  • परिवार में मधुमेह का इतिहास
  • पिछली किसी गर्भावस्था में यही तस्वीर दिखना
  • पहले हुआ कोई भारी वज़न वाला शिशु
  • बहुपुटीय अंडाशय सिंड्रोम जैसी इंसुलिन प्रतिरोध वाली स्थितियाँ

खून का अतिरिक्त ग्लूकोज़ नाल पार कर जाता है और शिशु के अपने इंसुलिन बनाने को बढ़ा देता है। शिशु का भारी पैदा होना इसीलिए ज़्यादा दिखता है। निगरानी की पहली सीढ़ी खान-पान की तरतीब और रोज़ का हिलना-डुलना है। थाली की मात्रा, नाश्ते की रोटी, शाम की सैर सब इसी सीढ़ी के भीतर हैं। ज़्यादातर स्त्रियाँ गर्भावस्था इसी सीढ़ी के साथ पूरी करती हैं, और कुछ में योजना में इंसुलिन भी आता है।

प्रसव के साथ नाल भी निकल जाती है, उसका बनाया हार्मोन-बोझ हट जाता है और इंसुलिन की ज़रूरत थोड़े समय में घट जाती है। पर गर्भ में पहली बार दिखी हर शुगर की ऊँचाई एक चीज़ नहीं है। विश्व स्वास्थ्य संगठन इस तस्वीर को दो शीर्षकों में बाँटता है: वह जो गर्भ से जुड़ी है, और वह जो गर्भ से पहले भी थी पर पहली बार उसी जाँच में पकड़ी गई। दूसरी में शक्कर प्रसव के बाद भी ऊँची रहती है, क्योंकि उसकी जड़ गर्भ नहीं थी।

समयसामान्य निगरानी
प्रसव के बाद के पहले दिनइंसुलिन की ज़रूरत तेज़ी से गिरती है, शक्कर अपनी सामान्य चाल पर लौटती है
प्रसव के 4 से 12 हफ़्ते बादलोड टेस्ट दोबारा किया जाता है, इस बार गर्भ के बाहर वाले पैमानों से आँका जाता है
आगे के बरस1 से 3 साल के अंतर पर दोहराई जाने वाली छानबीन; निगरानी उम्र भर चलती है

प्रसव के बाद के माप में बारी लोड टेस्ट की है। गर्भ में लाल कोशिकाओं का चक्र तेज़ होता है, और प्रसव में हुआ ख़ून का नुक़सान उसमें जुड़ जाता है; दोनों मिलकर HbA1c के नतीजे को नीचे खींच देते हैं। दिशानिर्देश इसीलिए पहले महीनों में HbA1c की जगह लोड टेस्ट को आगे रखते हैं। जिन स्त्रियों का गर्भावस्था के मधुमेह का इतिहास रहा है, उनमें आगे के बरसों में टाइप 2 मधुमेह की बारंबारता, बिना इस इतिहास वालों की तुलना में कई गुना ऊँची है। वही दिशानिर्देश लिखते हैं कि इस समूह में दिन की तरतीब बदलना और ज़रूरत पड़ने पर दवा का सहारा टाइप 2 मधुमेह तक पहुँचने में देर करा देता है।

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यह लेख सिर्फ़ जानकारी के लिए है; यह न रोग की पहचान है, न इलाज या मात्रा का निर्देश। आपके इलाज का फ़ैसला हमेशा वह होता है जो आप अपने डॉक्टर के साथ मिलकर लेते हैं।

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